Showing posts with label BJP. Show all posts
Showing posts with label BJP. Show all posts

Monday, March 14, 2022

पंजाब में चला ‘आम आदमी’ का झाड़ू , बही बदलाव की बयार

 

 

पंजाब में चला आम आदमीका झाड़ू , बही बदलाव की बयार

-लोगों ने कॉमेडियन भगवंत सिंह मान को लिया गंभीरता से

-मान ने कहा अब पंजाब गांवों-मोहल्लों से चलेगा, महलों-हवेलियों से नहीं

 

केजरीवाल-भगवंत मान की जोड़ी पर पूरा भरोसा जताते हुए पंजाब के आम आदमी ने विधान सभा चुनाव 2022’ में आम आदमी पार्टी(आप) को 92 सीटों के ऐतिहासिक बहुमत के साथ एक अप्रत्याशित जीत दिलवाई है।


1966 में हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद 56 साल के इतिहास में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीत कर आज तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की है। पंजाब में अन्तर्कलह की मारी कांग्रेस मात्र 18 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। पंजाब के पारंपरिक राजनैतिक दल शिरोमणि अकाली दल को पंजाब क ी  जनता ने पूरी तरह  नकारते हुए अकाली-बसपा के बेमेल गठबंधन को केवल 4 सीटें ही दी। वहीं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल(संयुक्त)की चुृनावी खिचड़ी ने भी केवल 2 सीटों पर सिमट कर, पंजाब में अपना जनाधार पूरी तरह खो दिया।

1992 में आतंकवाद के दौर में कांग्रेस ने पंजाब में 87 सीटें जीतकर सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड दर्ज किया था, मगर उस समय शिरामणि अकाली दल ने चुनावों का बहिष्कार किया था। उसके बाद 1997 में अकाली भाजपा गठबंधन ने मिलक र 97 सीटें जीती थी। अकाली दल को 75 व भाजपा को 18 सीटों पर जीत मिली थी।

इस बार यानी 2022 में कुल वोट प्रतिशत की बात करें तो इसमें भी आम आदमी पार्टी ने 44 प्रतिशत वोट हासिल कर सबको चौंका दिया है। दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को इस बाद 23 प्रतिशत और अकाली बसपा गठबंधन को 18.4 प्रतिशत वोट मिले हैं। यदि कुल वोट प्रतिशत की बात करें तो पंजाब में इस बार 2017 के मुकाबले लगभग 5 प्रतिशत मतदान कम हुआ। 2017 में जहां 77.20 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया वहीं 2022 में 71.95 प्रतिशत लोगों ने मतदान में भाग लिया।

इस बार पंजाब में आम आदमी पार्टी की सुनामी का अंदाजा इसी बात बात से लगाया जा सकता है कि 1920 में स्थापित हुई पार्टी शिरोमणि अकाली दल केवल 3 सीटें जीत कर तीसरे नंबर पर पहुंच गई। शिरोमणि अकाली दल के भीष्म पितामह 94 वर्षीय प्रकाश सिंह बादल भी इस बार अपनी साख नहीं बचा पाए और लंबी से शायद अपना आखिरी चुनाव हार गए। आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह खुड्डिया ने अकाली सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल को 66313 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से अपनी सीट नहीं बचा पाए। सुखबीर बादल को आम आदमी पार्टी के लॉ गे्रजुएट जगदीप कंबोज गोल्डी ने 30930 वोटों से हराया। भगवंत मान ने संगरूर जिले की धुरी विधान सभा सीट से कांग्रेस के दलबीर सिंह गोल्डी को 58206 रिकार्ड वोटों से हराया।

 

 

विभिन्न क्षेत्रों में पार्टियों को सीटें (कुल सीटें-117)

मालवा कुल सीटें     69

आम आदमी पार्टी       66

कांग्रेस                02

शिअद                01

 

माझा  कुल सीटें      25

आम आदमी पार्टी     16

कांग्रेस               07

शिअद                01

भाजपा              01

 

दोआबा कुल सीटें     23 

आम आदमी पार्टी     10

कांग्रेस              09

शिअद             01

बसपा             01

भाजपा            01

आजाद            01

 

 

अपनी कॉमेडी वीडियो में कहा था यदि ज्यादा नहीं पढ़ सका तो चुनाव लडक़र विधायक, मंत्री बन जाउंगा

कॉमेडियन से राजनेता बने भगवंत मान ने अपने एक पुराने कॉमेडी वीडिया में कहा था कि यदि मैं पढ़ लिख गया तो इंजीनियर डाक्टर बनूंगा और यदि ज्यादा नहीं पढ़ सका तो चुनाव लडक़र विधायक मंत्री तो बन ही जाउंगा। भगवंत मान की यही बात सच हुई। उन्होंने अपनी पढ़ाई बी-काम फस्र्ट इयर के बाद छोडक़र ही पहले कॉमेडी और उसके बाद राजनीति में हाथ आजमाए।

 

भगवंत मान का जन्म 17 अक्तूबर 1973 को पंजाब के  संगरूर जिले के संतोजत गांव में एक स्कूल टीचर महिंदर सिंह के घर हुआ। भगवंत मान की मां हरपाल कौर का कहना है कि वो बचपन से ही अपनी कामेडी से सभी को खूब हंसाता था। 1992 में मान ने संगरूर के शहीद उधम सिंह गवर्नमेंट कालेज में बी.कॉम में दाखिला लिया मगर बीच में ही पढ़ाई छोड़ कॉमेडी को ही अपना कैरियर बना लिया। भगवंत मान ने एक के बाद एक कॉमेडी की 35 एलबम रिलीज की। भगवंत मान अपने प्रत्येक कॉमेडी एलबम में कोई ना कोई गंभीर संदेश अवश्य देते रहे। चाहे वे सरकारी विभागों या राजनीति में भ्रष्टाचार हो समाज में फैली कुरीतियां हों या फिर युवाओं में बेरोजगारी या फिर नशे का मुद्दा हो। उनकी कॉमेडी एलबम कुल्फी गर्मा गरमऔर मिठियां मिर्चां  ने  भगवंत मान को रातों रात स्टार बना दिया। इसके अलावा मान ने कई हिंदी पंजाबी फिल्मों टीवी पर चलने वाले कॉमेडी शोज में भी अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। मान ने एक स्टैंडअप कामेडियन और राजनेताओं जोक्स व कटाक्ष से अपनी एक अलग पहचान बनाई। राजनेताओं पर कटाक्ष करते करते भगवंत मान ने 1992 पंजाब के पूर्व मंत्री व प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल द्वारा अकाली दल से अलग होकर बनाई गई पंजाब पीपल्स पार्टी(पीपीपी)से अपना  राजनैतिक कैरियर शुरु किया।

उन्होंने 2012 में विधान सभा चुनाव भी लड़ा मगर हार गए। 2014 में भगवंत मान आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए और अकाली दल के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के विरुद्ध संगरूर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और मान सुखदेव सिंह ढींढसा को 2 लाख से अधिक मतों से हराकर पहली बार सांसद बने। 2017 में मान ने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ जलालाबाद से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा मगर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 में भगवंत मान ने एक बाद फिर से संगरूर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अपने प्रतिद्वंद्वी  कांग्रेस के केवल सिंह ढिल्लों को एक लाख से अधिक मतों से हराया। कॉमेडी और लिखने के साथ साथ भगवंत मान को स्पोर्ट्स का भी बहुत शौक है। वह वालीबाल के भी खिलाड़ी रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें एनबीए, हॉकी, फुटबाल और क्रिकेट के मैच देखने का भी बहुत शौक है।

                                      ---

 

पहली हरी कलम बेरोजगारी दूर करने के लिए चलाएंगे

अपनी पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत के बाद भगवंत सिंह मान ने लोगों को देश-विदेश में बसे सभी पंजाबियों का धन्यवाद किया और कहा कि आपने अपनी जिम्मेदारी बेहद बखूबी के साथ निभाई है, अब जिम्मेदारी निभाने की बारी हमारी है। मान ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि हमारी नीयत अच्छी है, इसीलिए पंजाब के लोगों ने हम पर भरोसा किया है। मुझपर यकीन रखें, एक महीने में बदलाव दिखने लगेगा। अब आपको सरकारी दफ्तरों में बाबुओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब सरकारी बाबू आपके गांवों व मोहल्लों के चक्कर लगाएंगे और आपके घर पहुंचकर आपका काम करेंगे।

 

मान ने कहा कि मुझे सबसे ज्यादा फिक्र बेरोजगारी की है। बेरोजगार युवक मजबूर होकर नशे में डूब रहे हैं और विदेश जा रहे हैं। महंगी उच्च शिक्षा और रोजगार के अभाव के  कारण पंजाब का पैसा और प्रतिभा का पलायन हुआ है। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद हम पहले दिन ही अपनी हरी कलम बेरोजगारी दूर करने के लिए चलाएंगे। हम युवाओं के हाथ से टीका छीनकर टिफिन पकड़ाएंगे और उन्हें पंजाब में ही शिक्षा व रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराएंगे। मान ने कहा कि कांग्रेस-अकाली सरकार में पंजाब मोती महल, सिसवां फार्म हाउस और बड़ी-बड़ी हवेलियों से चला करता था। अब पंजाब की सरकार गांवों और मोहल्लों से चलेगी। हम पंजाब के सभी पौने तीन करोड़ लोगों की भलाई के लिए काम करेंगे और पंजाब को फिर से पंजाब बनाएंगे।

 

मान ने कहा कि अब पंजाब के सरकारी दफ्तरों में मुख्यमंत्री और नेताओं की तस्वीर नहीं लगेगी। सरकारी दफ्तरों में अब शहीद-ए-आजम भगत सिंह और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगेगी। भगत सिंह ने अपनी जान कुर्बान कर हमें आजादी दिलाई और आजादी मिलने के बाद बाबा साहब ने देश का संविधान लिख कर हमें स्वतंत्रता व समानता का अधिकार दिलाया। हमारा कर्तव्य है कि हम उनके मान को बढ़ाएं और उनके सपनों को साकार करें।

                               ---

 

पहली बार लुढक़े इतने बड़े बड़े दिग्गज

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 अपने चौंकाने वाले परिणामों, नए नए रिकार्डों व भारी उलट फेर के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यह तो चुनाव से पहले ही तय हो चुका था कि पंजाब की जनता ने पंजाब की दोनों रवायती पार्टियों को बदलने का मन बना लिया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के पक्ष में बदलाव की बयार पहले ही चलनी शुरु हो चुकी थी। आम आदमी पार्टी और इसके संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब प्रभारी राघव चड्ढा ने चुनावों से काफी पहले ही पंजाब में आम आदमी पार्टी के हक में हवा बनानी शुरु कर दी थी और आम आदमी पार्टी ने इस काम में अपने जनसंपर्क अभियान के तहत आम आदमी से डोर टू डोर मिलने के कार्यक्रम भी चुनावों तक निरंतर जारी रख कांग्रेस व अकालियों को काफी पीछे छोड़ दिया था। इस बार पंजाब की जनता ने केवल बदलाव के मद्देनजर कांग्रेस और अकाली दल के बड़े बड़े दिगगजों को धूल चटा दी। इनमें 5 बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उप मुख्यमंत्री व अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल, बड़े अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रमजीत मजीठिया, पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, कांग्रेस के पूर्व उप मुख्यमंत्री ओपी सोनी, पूर्व मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व मंत्री रजिया सुल्तान तथा पूर्व मंत्री आदेश प्रताप कैरों प्रमुख नाम हैं।

 

इनमें सबसे दिलचस्प बात तो यह रही कि लगभग तीस साल बाद इस बार 16वीं विधान सभा में बादल परिवार का कोई भी सदस्य विधानसभा में नहीं जा पाएगा, क्योंकि स्वयं प्रकाश सिंह बादल, उनके पुत्र सुखबीर बादल, सुखबीर बादल के साले बिक्रमजीत मजीठिया, प्रकाश सिंह बादल के दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों, प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल भी इस बार चुनाव हार गए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्रियों की बात करें तो इस बार के चुनावों में पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री(अब पंजाब लोक कांगे्रस) के कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी से, कांग्रेस की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल लैहरा से, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भदौड़ व श्री चमकौर साहिब से चुनाव हार चुके हैं।

मुख्यमंत्री चन्नी सहित पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल बठिंडा से, ओपी सोनी अमृतसर सेंट्रल से, राजकुमार वेरका अमृतसर वेस्ट से, विजय इंदर सिंगला संगरूर से, भारत भूषण आशु लुधियाना वेस्ट से, रजिया सुल्ताना मलेर क ोटला से, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत कोटली खन्ना से चुनाव हार गए हैं।

 

पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा डेरा बाबा नानक, पूर्व ओलंपियन परगट सिंह जालंधर कैंट, अरूणा चौधरी दीनानगर, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा फतेहगढ़ चूडिय़ां, राणा गुरजीत सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग गिदड़बाहा, सुखविंदर सरकारिया राजा सांसी सहित कुल आठ मंत्री तथा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष व राज्य सभा सांसद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा कादियां, से जीत दर्ज कर कांग्रेस की कुछ साख बचाने में सफल हुए।

                                    ---

 

 

पंजाब की पैड वूमेन के नाम से मशहूर जीवन ज्योत कौर ने सिद्धू और मजीठिया को दी मात

आम आदमी पार्टी की एक आम वालंटियर तथा लंबे समय से समाज सेवा से जुड़ी जीवन ज्योत कौर ने पंजाब के दो सबसे ताकतवर नेताओं को मात देकर इतिहास रच दिया है। जीवन ज्योत कौर ने अमृतसर ईस्ट से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू व माझा के बादशाह कहे जाने वाले पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को हरा कर सबको चौंका दिया। कानून में स्नातक जीवन ज्योत कौर को लोग पंजाब की पैड वूमैन के तौर पर भी जानते हैं। उन्होंने गांवों में महिलाओं को हाइजिन सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाने और रियूजेबल सैनेटरी नैपकिन प्रोमोट करने में बहुत काम किया है। पंजाब की जेलों में बंद महिलाओं को भी जीवन ज्योत सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाने ाक काम करती रही हैं। वह महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलवाने और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर काम कर रही हैं। चुनाव से पहले सभी नवजोत सिंह सिद्धू और बिक्रमजीत मजीठिया के बीच क ड़ा मुकाबला मान रहे थे और सभी ने जीवन ज्योत को बहुत हल्के में लिया था। परंतु जीवन ज्योत ने इन दोनो महारथियों को पटखनी देकर सिद्ध कर दिया कि कितना भी बड़ा नेता हो, जनता जिसका साथ देती है उसे कोई नहीं हरा सकता।

अमृतसर ईस्ट से जीवन ज्योत कौर को 39520, नवजोत सिंह सिद्धू को 32807 तथा बिक्रमजीत मजीठिया को 25112 वोट मिले। 

 

13 विजयी महिलाओं में से 10 पहली चुनाव लड़ी

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में 13 महिलाओं ने अपनी ताकत का अहसास करवाते हुए चुनावों में जीत दर्ज की है। इनमें आम आदमी पार्टी की नरिंदर कौर भरज संगरूर से, जीवन ज्योत कौर अमृतसर ईस्ट से, राजिंदरपाल कौर लुधियाना साउथ से, प्रोफेसर बलजिंदर कौर तलवंडी साबो से, डा.अमनदीप कौर मोगा से, सर्वजीत कौर मनूके जगरांव से, इंदरजीत कौर मान नकोदर से, संतोष कुमारी कटारिया बलाचौर से, नीना मित्तल राजपुरा से, अनमोल गगन मान खरड़ से, डा.बलजीत कौर मलोट से विजयी हुई हैं। कांग्रेस की अरुणा चौधरी दीनानगर से तथा शिरोमणि अकाली दल की गुनीव कौर मजीठिया मजीठा से चुनाव जीती हैं।

 

                                              -------------

 

Monday, January 3, 2022

यूपी चुनाव 2022 : पूर्वांचल में क्यों फोकस कर रही है बीजेपी?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वांचल को लेकर हैं गंभीर, काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और जेवर एयरपोर्ट से पहले पूर्वांचल को मिली विकास की सौगात

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है। प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश को लगातार विकास की सौगात तो दे ही रहे हैं साथ ही योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी लगातार कर रहे हैं।



देखने में ऐसा लग रहा है जैसे पीएम नरेन्द्र मोदी ने ही उत्तर प्रदेश की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में थाम ली है। वहीं, देखने में ये भी आ रहा है कि पीएम का ज्यादा फोकस पूर्वांचल पर केन्द्रित है। इसी फेहरिस्त में मोदी ने सिद्धार्थनगर और वारणसी को विकास की सौगात से भी नवाजा है।

जी हां, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसेवैसे राजनीतिक दलों ने अपने सियासी अभियान तेज कर दिए हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी ने यूपी चुनाव की कमान संभाल ली है। प्रधानमंत्री का अब पूरा फोकस पूर्वांचल पर केन्द्रित हो चला है।

अगर अक्टूबर की ही बात की जाए, अक्टूबर में ही प्रधानमंत्री ने पूर्वांचल क्षेत्र का दो बार दौरा किया है। साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए सौगात भी दी हैं। प्रधानमंत्री ने केन्द्र व राज्य सरकार की यहां उपलब्धियां गिनाकर मिशन 2022 को सफल बनाने की यहां के लोगों से अपील की है।


9 मेडिकल कॉलेज की सौगात

पीएम नरेन्द्र मोदी ने सिद्धार्थनगर से उत्तर प्रदेश को एक साथ 9 मेडिकल की सौगात दी है। माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय का लोकार्पण करने के साथ 2239 करोड़ रुपये की लागत से देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, जौनपुर के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेजों के राज्य स्वशासी मेजिकल कालेजों का वर्चुअल लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया।

यूपी के लिए पूर्वांचल की जीत जरूरी

देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है तो यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है। इसी फॉर्मूले से लगातार दो लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी मिशन-2022 के लिए पूर्वांचल में पैठ बनाने की कोशिश में है। इसी के मद्देनजर पीएम मोदी का फिलहाल पूरा फोकस पूर्वांचल पर है। पीएम मोदी एक तरफ पूर्वांचल को मेडिकल कॉलेजों की सौगात दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्वांचल के विकास के लिए योजना भी तैयार करवाकर पूर्वांचल के लोगों को सौंपने की बात कह रहे हैं।

दरअसल, किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी कांड के बाद से पश्चिम यूपी, तराई बेल्ट और अवध के इलाके में सरकार के खिलाफ माहौल गर्म है। वहीं, पूर्वांचल अभी भी बीजेपी का गढ़ माना जाता है। जिसकी सबसे बड़ी वजह पीएम नरेन्द्र मोदी का वाराणसी से सांसद होना है और गोरखपुर से सीएम योगी का होना है।

पूर्वांचल में राजभर ने बढ़ाई चुनौती

हालांकि, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर औऱ सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हाथ मिलाने के बाद बीजेपी के सामने अपने दुर्ग पूर्वांचल को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं बीजेपी को लोकसभा औऱ जिला पंचायत अध्यक्ष के  चुनाव में पूर्वांचल इलाके में ही झटका लगा था। इसीलिए बीजेपी लगातार पूर्वांचल के सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुटी है।

यूपी में चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूर्वांचल में करीब 6 जनसभा रखी हैं। इन चुनावी जनसभा में प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाकर मिशन 2022 को सफल बनाने की लोगों से अपील करेंगे। इसकी शुरुआत करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने 20 अक्टूबर को भगवान बुद्ध की धरती कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी शुभारंभ किया और चुनावी जनसभाओं का एक तरह से आगाज भी कर दिया।

कुशीनगर में एयरपोर्ट के साथ-साथ पीएम मोदी 478.74 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की भी सौगात दी है। 116.21 करोड़ से तैयार 11 परियोजनाओं का लोकार्पण और 362.53 की लागत से मेडिकल कॉलेज सहित तीन परियोजनाओं का तोहफा पीएम मोदी ने पूर्वांचल को दिया है। इसके अलावा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर के खाद कारखाना मैदान में जनसभा भी अक्टूबर में ही की गयी। इस जनसभा के बाद खाद कारखाना व गोरखपुर एम्स का लोकार्पण भी किया जाना है।

 

बीजेपी का सियासी समीकरण

पूर्वांचल में बीजेपी ने अपने समीकरण को मजबूत बनाए रखने के लिए जातीय आधारित पार्टियों के साथ भी गठबंधन कर रखा है। अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) और संजय निषाद की निषाद पार्टी के साथ बीजेपी मिलकर इसबार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाएगी। बीजेपी के इन दोनों ही दलों का सियासी आधार पूर्वांचल के जिलों में है। अनुप्रिया पटेल की कुर्मी वोटों पर पकड़ है तो संजय निषाद का मल्लाह समुदाय पर। इसके अलावा बीजेपी की नजर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी पर भी है। जिनके साथ गठबंधन फिर से किये जाने की चर्चाएं तेज हैं। इस तरह बीजेपी पूर्वांचल के सियासी रण को बीजेपी मजबूती के साथ जीतने की रणनीति तैयार कर रही है।

यूपी की 33 फीसदी सीटें पूर्वांचल में हैं

पूर्वांचल की जंग फतह करने के बाद ही यूपी की सत्ता पर कोई पार्टी काबिज हो सकती है। क्योंकि सूबे की 33 फीसदी सीटें इसी इलाके की हैं। यूपी के 28 जिले पूर्वांचल में आते हैं। जिनमें कुल 164 विधानसभा सीटें हैं। 2017 के चुनाव में पूर्वांचल की 164 सीटों में से बीजेपी ने 115 सीट पर कब्जा जमाया था। जबकि सपा ने 17, बसपा ने 14, कांग्रेस ने 2 और अन्य को 16 सीटें मिली थी। हालांकि पिछले तीन दशक में पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा। वह एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव में एक का साथ छोड़कर दूसरे का साथ पकड़ता रहा है। यही वजह है कि बीजेपी 2022 के चुनाव में अपने गढ़ को मजबूत करने में जुट गई है।

मोदी का मिशन पूर्वांचल

पीएम मोदी ने अपने चुनावी अभियान के लिए एक बार फिर पूर्वांचल की धरती को ही चुना। इसके पहले पीएम ने 2014 – 2019 के लोकसभा और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत पूर्वांचल से ही की थी। मिशन – 2022 का आगाज भी पूर्वांचल में कुशीनगर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात से किया गया और सिद्धार्थनगर और काशी का दौरा कर चुनावी माहौल बनाया गया।

बहरहाल, पीएम मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब पूरी तरह से चुनावी मोड में हैं। और राजनीति के जानकारों की माने तो बीजेपी उत्तर प्रदेश में किसी भी हाल में अपने हाथ से छूटने नहीं देना चाहती। साथ ही बीजेपी को इस बात का भी अंदाजा है कि इसबार का उत्तर प्रदेश का चुनाव उतना भी आसान नहीं होगा और जीत का आंकड़ा भी शायद वो नहीं होगा जो पिछली विधानसभा चुनाव के समय में था। वहीं, सच ये भी है कि उत्तर प्रदेश में इस बार बीजेपी के साथ बसपा, सपा और कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी भी सत्ता में आने का सपना संजोय बैठी हैं और जोड़ तोड़ की राजनीति के साथ-साथ हर एक वो हथकंडा अपना रही हैं जिससे उन्हें उत्तर प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सीटें मिल जाए। 

बॉक्स...एक

मुस्लिम वोटों के लए उलेमाओं की शरण में सपा, अबु आजमी से अखिलेश यादव तक सक्रिय

मुस्लिम वोटों के दम पर ही मुलायम सिंह यादव तीन बार और अखिलेश यादव एक बार उत्तर प्रदेश में सत्ता की कमान संभाल चुके हैं। अब 2022 के यूपी चुनाव में मुसलमानों को सपा अपने साथ मजबूती से जोड़ने के लिए उलेमाओं का सहारा लेने की कवायद में जुट गयी है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में मुसलमानों की भूमिका अहम मानी जाती है। यह बात समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बेहतर भला कौन समझ सकता है।

मुस्लिम उलेमाओं से मिलकर वोटर्स को साधने की कोशिश में सपा प्रमुख

सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह पहुंचे। यहां उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद राशीद फरंगी महली से मिलकर मोहम्मद साहब के जन्मदिन की बधाई दी। वहीं, सपा के मुस्लिम नेता व विधायक अबु आसिम आजमी ने भी लखनऊ में मुस्लिमों के धार्मिक संगठन सुन्नी मजलिस-ए-अमल के अध्यक्ष मौलान वली फारूकी सहित तमाम उलेमाओं के साथ मुलाकात औऱ बैठक की। इस बैठक की फोटो भी आजमी ने खुद अपने सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

 

मुस्लिमों के बीच ओवैसी की सक्रियता

उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में बीजेपी के हार्ड हिन्दुत्व के सामने अखिलेश यादव खुलकर मुस्लिम कार्ड खेलने से अभी तक बच रहे थे। लेकिन, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में बढ़ती सक्रियता और कांग्रेस की मुस्लिम वोटों पर नजर को देखते हुए सपा के सामने अपने कोर वोट बैंक को साधे रखने की चुनौती है। ऐसे में अखिलेश यादव के बाद सपा नेता अबु आसिम आजमी की सूबे के उलेमाओं के साथ हुई मुलाकात को 2022 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, ओवैसी ने सूबे की 100 सीटों पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान किया है। पिछले 8 महीनों से ओवैसी यूपी का लगातार दौरा कर रहे हैं और उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाके की सीटों को टारगेट किया है। ओवैसी मुस्लिम लीडरशिप को स्थापित करने और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को सबसे बड़ा सियासी हथियार बना रहे हैं। मुस्लिम युवाओं के बीच ओवैसी का सियासी ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है तो कांग्रेस भी मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लाने के तमाम जतन कर रही है। उलेमाओं से लेकर मस्जिदों तक सहारा ले रही है।

 

आजम की जगह आजमी मुस्लिम चेहरा

वही, सपा के कद्दावर मुस्लिम चेहरा व रामपुर से सांसद आजम खान के जेल में बंद होने के चलते पार्टी के पास कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है। ऐसे में अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र के मुंबई से विधायक अबु आसिम आजमी को यूपी के लिए मुसलमानों को साधे रखने का जिम्मा सौंपा है। आजमी सूबे में अलग-अलग जिलों का दौरा करके मुस्लिमों को सपा से जोड़ने की मुहिम में जुटे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने सुन्नी मुजलिस-ए-अमल के अध्यक्ष मौलाना वली फारूकी के साथ बैठक की है।

 

यूपी में 20 फीसदी मुस्लिम वोटर अहम

उत्तर प्रदेश में करीब 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। सूबे की कुल 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं। इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी 20 से 30 फीसदी के बीच है। 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान 30 फीसदी से ज्यादा है। सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं जबकि करीब 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को खासा प्रभावित करते हैं। इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की है।

 

क्या मुस्लिमों की पहली पसंद बनेगी सपा

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बाच सपा की अच्छी पैठ मानी जाती है। सूबे में 20 फीसदी मुस्लिम औऱ 10 फीसदी यादव वोटरों के सहारे सपा के एम-वाई समीकरण के दम पर मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव यूपी की सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हो चुके हैं।

1990 का अयोध्या गोलीकांड औऱ उसके बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस के चलते सूबे में जो माहौल बदला उसमें मुस्लिम वोटों का सबसे ज्यादा फायदा मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा को मिला। इसी मुस्लिम वोटों के दम पर मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव तक सूबे के मुख्यमंत्री बने।

 


यूपी के सियासी माहौल में अखिलेश यादव मुस्लिम और यादव वोटों को अपना कोर वोटबैंक मानकर चल रहे हैं। 2022 में सत्ता में वापसी के लिए मुस्लिम-यादव वोटबैंक में अन्य ओबीसी के वोटों के कुछ हिस्से को जोड़ने की कोशिश में अखिलेश यादव जुटे हैं। बीजेपी के पास सत्ता होने के चलते जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उसमें अभी तक मुस्लिम के बीच सपा सबसे पहली पंसद मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस से लेकर बसा और मुस्लिम पार्टियां यादव मुस्लिम समीकरण को तोड़ने की कवायद में जुटी है। इसीलिए सपा भी मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ कायम रखने के लिए उलेमाओं का सहारा ले रही है।

UP Election 2022: '22 के रण' से '24 की पिच' की तैयारी कर रही है भाजपा, काशी विश्वनाथ, जेवर पूर्वांचल से क्या सधेगा निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणभेरी अभी तक बजी नहीं है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में बीजेपी पूरे चुनावी मोड में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार उत्तर प्रदेश में रैली, उद्घाटन, शिलान्यास और योजनाओं की सौगात दे रहे हैं। वहीं, पूर्वांचल में खाद कारखाना, मेडिकल कॉलेज और तकरीबन 3000 करोड़ की योजनाओं की घोषणा करने के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में जेवर एयरपोर्ट, फिल्मसिटी की सौगात सैंपी।


अब प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के पहले चरण के पूरे होने के बाद उद्घाटन किया है। जिसके बाद यह साफ देखने को मिल रहा है कि बीजेपी अब उत्तर प्रदेश को लेकर पूरे चुनावी मोड में है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर काफी गंभीर हैं।

वहीं, अब जिन परियोजनाओं का हो रहा शिलान्यास, उनका 2024 से पहले उद्घाटन होगा। केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं में तेजी दिखेगी।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि चुनाव तो 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का है लेकिन इसके बहाने भाजपा 2024 की पिच भी तैयार कर रही है। इस पिच पर विकास का उछाल होगा तो आस्था के नाम पर स्विंग भी खूब पड़ेंगी। इसके लिए टीम भाजपा ने अपनी एक कोर कमेटी का गठन भी कर दिया है। जो अभी से 2024 में चुनावी रोड मैप तैयार करने लगा है। इस कमेटी के सदस्यों का काम उन योजनाओं पर नजर रखने के साथ उनको 2024 चुनाव से पहले तक पूरा करवाने का भी है जिनका प्रधानमंत्री शिलान्यास कर रहे हैं या राज्य और केंद्र सरकारें जिन बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने वाली हैं। 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों का माहौल बनाने की शुरुआत तो भारतीय जनता पार्टी ने विकास के मॉडल के साथ की है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर से बने चुनावी माहौल से अब तक उत्तर प्रदेश में जितने दौरे किए हैं वह सभी विकास के नाम पर शुरू हुए प्रोजेक्ट के उद्घाटन और शिलान्यास से ही हुए हैं। इसमें कुछ प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ तो कुछ का उद्घाटन भी किया गया। 

भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जिन प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ उसका निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश के चुनाव में फायदा मिलेगा। वह कहते हैं कि जिन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है उनमें ज्यादातर का उद्घाटन 2024 से पहले हो जाएगा। ऐसे में एक बात तो बिल्कुल साफ है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में विकास के नाम पर रखी गई आधारशिलाओं से 2024 का चुनाव भी सधेगा। 




कमेटी के हर सदस्य की जिम्मेदारियां तय

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी ने अपने तमाम राजनैतिक और आस्था के मुद्दों के साथ विकास को ही तरजीह दी है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिन प्रोजेक्ट का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी ने किया है उसकी गति पर नजर रखने के लिए पार्टी ने एक कोर कमेटी का गठन भी किया है। इस कोर कमेटी में केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों के साथ-साथ राज्य स्तर के पार्टी पदाधिकारी भी शामिल हैं। 

सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी की एक और कमेटी इन प्रोजेक्ट को न सिर्फ मॉनिटर करेगी बल्कि इस पर लगातार नजर भी रखेगी। कोर कमेटी से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि जो प्रोजेक्ट 2024 तक शुरू होने हैं उनको और तेज गति देने के लिए कमेटी संबंधित मंत्रालय और अधिकारियों के संपर्क में भी रहेगी, ताकि किसी भी तरीके की कोई लापरवाही न हो। ऐसे सभी सदस्यों के पास किसी न किसी तरीके की जिम्मेदारियां हैं जो समय-समय पर पार्टी आलाकमान को अपना फीडबैक भी देती रहेंगी।

2024 में होने वाले लोकसभा के चुनावों से पहले कई अहम प्रोजेक्ट सिरे चढ़ चुके होंगे या चढ़ने वाले होंगे। बनाई गई कोर कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा। इसे लोकसभा या विधानसभा के चुनावों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह जब पूरे होंगे तो निश्चित तौर पर किसी न किसी चुनाव के दौरान उद्घाटन और शिलान्यास होते रहेंगे। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जिस तरीके से बीते कुछ महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया है वह 2024 से पहले सिरे चढ़ने शुरू हो जाएंगे। 

हर प्रोजेक्ट की टाइम लाइन तय 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास किया था। इस एयरपोर्ट का रनवे 2023 में शुरू होना है। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 दिसंबर को गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास कर दिया। इस प्रोजेक्ट को भी 2024 से पहले शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा बुंदेलखंड में बनने वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का भी अगले महीने लोकार्पण किया जाएगा और 2024 से पहले एक बड़े फेज को न सिर्फ शुरू किया जाएगा बल्कि कनेक्टिंग एक्सप्रेस वे से जोड़ भी दिया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश में ही अगले 3 साल में कई और डोमेस्टिक एयरपोर्ट न सिर्फ बनाए जाएंगे बल्कि उनको भी शुरू करने की योजना है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो को शुरू किया जाना है जिसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक 2024 से पहले कई बड़े शहरों में मेट्रो की शुरुआत हो जाएगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को भी पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा। अगले 3 सालों के भीतर उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइल भी इसी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में बननी शुरू हो जाएगी। 

सूत्रों के मुताबिक सिर्फ यही नहीं बल्कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बाद केंद्र सरकार की योजना है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए पूरे नॉर्थ ईस्ट को एक बड़े एक्सप्रेस से कनेक्ट किया जाए। इसके अलावा तय योजना के मुताबिक 2023 में ही राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी विकास और आस्था के इस पूरे मॉडल के साथ 2024 की पिच अभी से तैयार करने लगी है।

बॉक्स ....

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वांचल को लेकर हैं गंभीर, काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और जेवर एयरपोर्ट से पहले पूर्वांचल को मिली विकास की सौगात

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है। प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश को लगातार विकास की सौगात तो दे ही रहे हैं साथ ही योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी लगातार कर रहे हैं।

देखने में ऐसा लग रहा है जैसे पीएम नरेन्द्र मोदी ने ही उत्तर प्रदेश की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में थाम ली है। वहीं, देखने में ये भी आ रहा है कि पीएम का ज्यादा फोकस पूर्वांचल पर केन्द्रित है। इसी फेहरिस्त में मोदी ने सिद्धार्थनगर और वारणसी को विकास की सौगात से भी नवाजा है।

जी हां, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसेवैसे राजनीतिक दलों ने अपने सियासी अभियान तेज कर दिए हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी ने यूपी चुनाव की कमान संभाल ली है। प्रधानमंत्री का अब पूरा फोकस पूर्वांचल पर केन्द्रित हो चला है।

अगर अक्टूबर की ही बात की जाए, अक्टूबर में ही प्रधानमंत्री ने पूर्वांचल क्षेत्र का दो बार दौरा किया है। साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए सौगात भी दी हैं। प्रधानमंत्री ने केन्द्र व राज्य सरकार की यहां उपलब्धियां गिनाकर मिशन 2022 को सफल बनाने की यहां के लोगों से अपील की है।

 


9 मेडिकल कॉलेज की सौगात

पीएम नरेन्द्र मोदी ने सिद्धार्थनगर से उत्तर प्रदेश को एक साथ 9 मेडिकल की सौगात दी है। माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय का लोकार्पण करने के साथ 2239 करोड़ रुपये की लागत से देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, जौनपुर के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेजों के राज्य स्वशासी मेजिकल कालेजों का वर्चुअल लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया।

यूपी के लिए पूर्वांचल की जीत जरूरी

देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है तो यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है। इसी फॉर्मूले से लगातार दो लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी मिशन-2022 के लिए पूर्वांचल में पैठ बनाने की कोशिश में है। इसी के मद्देनजर पीएम मोदी का फिलहाल पूरा फोकस पूर्वांचल पर है। पीएम मोदी एक तरफ पूर्वांचल को मेडिकल कॉलेजों की सौगात दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्वांचल के विकास के लिए योजना भी तैयार करवाकर पूर्वांचल के लोगों को सौंपने की बात कह रहे हैं।

दरअसल, किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी कांड के बाद से पश्चिम यूपी, तराई बेल्ट और अवध के इलाके में सरकार के खिलाफ माहौल गर्म है। वहीं, पूर्वांचल अभी भी बीजेपी का गढ़ माना जाता है। जिसकी सबसे बड़ी वजह पीएम नरेन्द्र मोदी का वाराणसी से सांसद होना है और गोरखपुर से सीएम योगी का होना है।

पूर्वांचल में राजभर ने बढ़ाई चुनौती

हालांकि, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर औऱ सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हाथ मिलाने के बाद बीजेपी के सामने अपने दुर्ग पूर्वांचल को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं बीजेपी को लोकसभा औऱ जिला पंचायत अध्यक्ष के  चुनाव में पूर्वांचल इलाके में ही झटका लगा था। इसीलिए बीजेपी लगातार पूर्वांचल के सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुटी है।

यूपी में चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूर्वांचल में करीब 6 जनसभा रखी हैं। इन चुनावी जनसभा में प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाकर मिशन 2022 को सफल बनाने की लोगों से अपील करेंगे। इसकी शुरुआत करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने 20 अक्टूबर को भगवान बुद्ध की धरती कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी शुभारंभ किया और चुनावी जनसभाओं का एक तरह से आगाज भी कर दिया।

कुशीनगर में एयरपोर्ट के साथ-साथ पीएम मोदी 478.74 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की भी सौगात दी है। 116.21 करोड़ से तैयार 11 परियोजनाओं का लोकार्पण और 362.53 की लागत से मेडिकल कॉलेज सहित तीन परियोजनाओं का तोहफा पीएम मोदी ने पूर्वांचल को दिया है। इसके अलावा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर के खाद कारखाना मैदान में जनसभा भी अक्टूबर में ही की गयी। इस जनसभा के बाद खाद कारखाना व गोरखपुर एम्स का लोकार्पण भी किया जाना है।

बीजेपी का सियासी समीकरण

पूर्वांचल में बीजेपी ने अपने समीकरण को मजबूत बनाए रखने के लिए जातीय आधारित पार्टियों के साथ भी गठबंधन कर रखा है। अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) और संजय निषाद की निषाद पार्टी के साथ बीजेपी मिलकर इसबार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाएगी। बीजेपी के इन दोनों ही दलों का सियासी आधार पूर्वांचल के जिलों में है। अनुप्रिया पटेल की कुर्मी वोटों पर पकड़ है तो संजय निषाद का मल्लाह समुदाय पर। इसके अलावा बीजेपी की नजर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी पर भी है। जिनके साथ गठबंधन फिर से किये जाने की चर्चाएं तेज हैं। इस तरह बीजेपी पूर्वांचल के सियासी रण को बीजेपी मजबूती के साथ जीतने की रणनीति तैयार कर रही है।

यूपी की 33 फीसदी सीटें पूर्वांचल में हैं

पूर्वांचल की जंग फतह करने के बाद ही यूपी की सत्ता पर कोई पार्टी काबिज हो सकती है। क्योंकि सूबे की 33 फीसदी सीटें इसी इलाके की हैं। यूपी के 28 जिले पूर्वांचल में आते हैं। जिनमें कुल 164 विधानसभा सीटें हैं। 2017 के चुनाव में पूर्वांचल की 164 सीटों में से बीजेपी ने 115 सीट पर कब्जा जमाया था। जबकि सपा ने 17, बसपा ने 14, कांग्रेस ने 2 और अन्य को 16 सीटें मिली थी। हालांकि पिछले तीन दशक में पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा। वह एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव में एक का साथ छोड़कर दूसरे का साथ पकड़ता रहा है। यही वजह है कि बीजेपी 2022 के चुनाव में अपने गढ़ को मजबूत करने में जुट गई है।