ये वो खबर है...जो मीडिया के लोग चिल्ला चिल्ला कर चैनलों पर गा रहे थे....उन्हें टीआरपी की रेस में रहने के लिए लगातार ऐसी खबर देनी थी...जिसपर आम और खास आदमी की लगातार नजर बनी रहे...टीवी पर दनादन खबरों के बीच में चैनल बदलता जा रहा था...तभी देश के नंबर एक चैनल पर आकार मेरा हाथ रूक गया...यहां देश के दो बड़े पत्रकार आपस में बात कर रहे थे...इनमें से एक पत्रकार ऐसे हैं...जो देश का सबसे बड़ा अखबार चलाने का दम भरते हैं...दूसरे वो है जो अखबार के दफ्तर में कम और मनमोहन सोनिया के दरबार में ज्यादा दिखाई देते हैं। यहां बीच बहस में देश के जाने माने कुछ फिल्मी कलाकार भी कोढ़ में खाज की तरह उटपटांग सवाल इनसे पूछ रहे थे...जो बेशक पेट पकड़कर हंसाने के लिए काफी थे....इनमें से एक ने दूसरे से पूछा कि अन्ना को भला इतनी क्या जल्दी थी...लोकपाल बिल को लेकर अनशन करने की...और देश की व्यवस्था बिगाड़ने की...हमने इमरजेंसी का दौर देखा है...कहां है इमरजेंसी सभी कुछ तो ठीक चल रहा है...कहां हो रहा है ऐसे भ्रष्टाचार जिसपर इतनी चीख चिल्लाहाट अन्ना मचा रहे हैं...कहां है....ऐसे हालात की जनता त्राही त्राही कर रही है...इसपर दूसरे ने हां जी हां जी में सिर हिलाते हुए कहा आप ठीक कह रहे हैं...अन्ना बेवजह ही चीख चिल्ला रहे हैं...अन्ना को चाहिए कि वो चुनाव लड़े और संसद में आये और उसके बाद अपनी बात पटल पर रखे....पहले ने इसपर रियेक्ट करते हुए कहा...अगर वो चुनाव भी नहीं लड़ना चाहते तो देश के संविधान पर भरोसा रखे...और एक बहस हो जाने दें...जिसके बाद वो अपनी बात रखे...वाह रे हमारे देश के बुढ़े गिद्दों...तुम्हारी मां.......सालों...
खैर ये तो रही उन लोगों की बात जो समाज के ठेकेदार बनने का दावा करते हैं...अब जरा दिल्ली पुलिस का पूरा बयान पर भी गौर कर लेते हैं......दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि किसी संज्ञेय अपराध की आशंका और शांति भंग की आशंका को देखते हुए अन्ना हज़ारे, अरविंद केजरीवाल और उनके पांच अन्य सहयोगियों को धारा 107, 151 के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया। कमिश्नर बीके गुप्ता के अनुसार किरण बेदी और शांति भूषण सहित क़रीब 14 सौ लोगों को धारा 65 के तहत हिरासत में लिया गया।
क्या अजीब बात है...एक समाजसेवी को दिल्ली पुलिस इसलिए गिरफ्तार कर लेती है...क्योंकि वो आम आदमी की आवाज उठाना चाहता है....उसके साथ आम जनता को इसलिए गिरफ्तार किया जाता है...क्योंकि वो अन्ना की आवाज बुलंद करके देश में एक ऐसा कानून लाना चाहते हैं...जो भ्रष्टाचार को खत्म करने का माद्दा रखता है.....वहीं कांग्रेसी नेता अन्ना को समाज का दुश्मन बताकर अपनी बांहों की आस्तीनों को ऊपर चढ़ाकर कामयाबी का दंभ भर रहे हैं....किसका देश है...ये कौन है ये कुछ लोग...जिन्हें इतने अधइकार मिल गए कि देश में कौन सही कर रहा है कौन गलत....ऐसा क्या कह दिया अन्ना ने जिसपर सरकार के कारिंदों को इतना गुस्सा है...खैर अन्ना अब तिहाड़ में हैं...और मैं यहीं सोच रहा हूं...कि आजादी के 64 साल बाद भी क्या ये देश आम आदमी का देश बन पाया है।






